Ram Mandir: कब आएंगे राम और करेंगे उद्धार, प्रतीक्षा में 22 वर्षों से ताले में है ये शिलाएं
Ayodhya Ram Mandir: उत्तर प्रदेश के अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर की चर्चाएं दुनियाभर में हो रही है। बरसों से टेंट में विराजित रहे रामलला ‘भव्य मंदिर’ में विराजित हो रहे है। धर्म नगरी अयोध्या में हर उस सुविधा को मजबूत और सुरक्षित किया जा रहा है, जो पर्यटन की दृष्टि से बेहतर हो। लेकिन इस बीच जिसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है, वो है “उद्धार की प्रतीक्षा में 22 वर्षों से ताले में बंद शिलाएं।” चलिए आज इन्हीं की बात करते है –
राम मंदिर आंदोलन से लेकर अब तक कई हजारों शिलाएं रही, जिनका Ram Mandir के किसी न किसी हिस्से में इस्तेमाल हो चुका है या फिर होने वाला है। लेकिन कुछ शिलाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें आज भी अपने अहिल्या मोचन (उद्धार) का इंतजार है। ये शिलाएं बेसब्री से इंतजार कर रही है कि कब प्रभु श्री राम की कृपा होगी और कब उनका इस्तेमाल मंदिर के किसी हिस्से में होगा। इन सबमें वो खास शिला भी है, जिसे 2002 में प्रधानमंत्री वाजपेयी के दूत को सौंपा गया था।
22 साल से ताले की कैद में है शिलाएं
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूत को यह शिला प्रतीकात्मक रूप से पूजन करने के बाद सौंपी गई थी। यह शिला आज भी ट्रेजरी के डबल ताले में बंद है। इस शिला को राममंदिर आंदोलन के अगुवा महंत रामचंद्र दास परमहंस ने Atal Bihari Vajpayee के दूत शत्रुघ्न सिंह को सौंपा था।
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इन शिलाओं का भी नहीं हो रहा उद्धार
– साल 2023 में नेपाल के कालीगंडकी तट से दो बड़ी शिलाएं अयोध्या आई थी। इनका वजन 14 और 27 टन है। इन शिलाओं को जनकपुर के जानकी मंदिर से भेजा गया था। जब ये देश में आई तो इनका पूजन और सत्कार हुआ। चर्चा थी कि इन शिलाओं से ही Shri Ram और बाकी भाइयों की मूर्तियां तैयार होंगी।
– कर्नाटक से भी तीन श्याम रंग की शिलायें अयोध्या आयी हुई है। इसके अलावा राजस्थान से भी तीन शिलाएं आई हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में कार्यशाला में काम में लगे एक व्यक्ति से बातचीत के आधार पर लिखा गया है कि नेपाल से आई शिलाओं को मूर्तिकारों ने मूर्ति तराशने के उपयुक्त नहीं माना हैं। हालांकि, कुछ संतों द्वारा यह भी कहा गया कि ‘कालीनदी की चट्टानों को तोड़ा नहीं जाना चाहिए क्योंकि वे शालिग्राम के बराबर हैं।’
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