Makar Sankranti से जुड़ी है 'श्री राम' की यह कथा, जानें रोचक और दिलचस्प जानकारी

Makar Sankranti Special: मकर संक्रांति यानी ‘पतंगों का महोत्सव।’ यह बात तो हर कोई जानता है लेकिन इस पर्व को ‘देवताओं की सुबह’ के तौर पर भी देखा जाता है। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और अनुष्ठान का बहुत महत्व माना जाता है। ‘मकर संक्रांति’ को लेकर हिंदू पौराणिक कथाओं में कई तरह की बातें लिखी और कही गई है। एक कथा के अनुसार महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपना देह त्याग करने के लिए मकर संक्रांति का चयन किया था।

श्री राम ने उड़ाई पतंग तो इंद्रलोक पहुंची

हिंदू पौराणिक कथाओं में Makar Sankranti का उल्लेख श्री राम के साथ भी किया जाता है। एक कथा के अनुसार मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा की शुरुआत भगवान राम ने की थी। जब भगवान राम ने पहली बार इस त्यौहार में पतंग उड़ाई थी तो वह पतंग इंद्रलोक में चली गई थी। उसी समय से प्रभु राम की इस परंपरा को लोग ‘मकर सक्रांति’ के दिन बड़े ही श्रद्धा से मनाते हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों में इस त्यौहार को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

इस त्योहार को भारत के तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, पंजाब में लोहड़ी, असम में भोगली, बंगाल में गंगासागर और उत्तर प्रदेश में खिचड़ी के नाम से जाना जाता हैं। आसमान पतंगों से सजा दिखाई देता है। मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य देव की पूजा की जाती है। दान-पुण्य के कार्य किये जाते है।

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पतंग उड़ाने के पीछे है वैज्ञानिक कारण

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं कि खुले आसमान में पतंग उड़ाने से हमें सूर्य से Vitamin D मिलता है। जिससे हमारे शरीर को काफी जरूरत होती है, साथ ही धूप में पतंग उड़ाने से सर्दी की हवाओं से भी बचा जा सकता है और शरीर को रोग मुक्त रखा जा सकता है।

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