77th Independence Day: 15 August 2023-जब गीत गाकर महाराणा प्रताप ने की देश की रक्षा, यह कहानी जगा देगी देशभक्ति

15 August 2023 को भारत अपना 76वां स्वतंत्रता दिवस (76th Independence Day) मनाने जा रहा हैं। हर भारतवासी के लिए यह विशेष दिन होता हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर में देशभक्ति गीतों को स्वर कानों में सुनाई देने लगता है। हर कोई इस दिन देशप्रेम में डूब जाना चाहता है। हर भारतवासी को उसकी देश के लिए जिम्मेदारी को याद दिलाता हैं स्वतंत्रता दिवस। आजादी के इस पर्व के मौके पर हम आपके साथ महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) से जुड़ी एक रोचक कथा साझा कर रहे है। यह कथा हमें सिखाती है कि देशभक्ति कैसे निभाई जाती है? यह कहानी हमें बताती है कि मौजूदा समय में देशभक्ति कैसी होनी चाहिए? चलिए आगे पढ़ते हैं-

Maharana Pratap
Maharana Pratap

जब गीत गाकर की प्रताप ने देश की रक्षा

राजस्थान की धरती को जिस नाम पर अभिमान हैं, वो हैं महाराणा प्रताप। चित्तौड़ के राणा रहे उदय सिंह के पुत्र प्रताप थे, जिन्होंने बाद में चित्तोड़ की सत्ता भी संभाली। प्रताप की देश भक्ति क्या थी, उसकी गवाही इतिहास देता है। प्रताप को अपने बाल्यकाल से ही गीत-संगीत का काफी शौक था। वह सदैव देशभक्ति के गीतों में मशगूल रहा करते थे। लोग उन्हें इसके लिए मनाही करते थे और कहते थे कि उनका काम तबले या ढोल बजाना नहीं तलवार और बरची चलाना हैं।

प्रताप एक ही बात कहा करते थे-“देशभक्ति केवल तलवार से ही जाहिर नहीं होती। और मेरा यह कथन में सिद्ध करके बताऊंगा।”

यह वो समय था जब चित्तौड़ सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हुआ करता था। उस समय आधे से अधिक भारतवर्ष में मुगलों ने अपना आधिपत्य कर लिया था। लेकिन वे चित्तौड़ को भेद नहीं पा रहे थे। चित्तौड़ लंबे समय तक मुगलों के लिए गले की फांस बना रहा। मुग़ल मानते थे कि चित्तोड़ पर पार पाना इतना आसान नहीं हैं।

15 August 2023: Maharana Pratap saved the country by singing
15 August 2023: Maharana Pratap saved the country by singing

चारण गीत शिक्षा से प्रताप ने मुगलों को खदेड़ा

एक बार मुगलों ने चित्तौड़ पर हमला किया। उस समय राजपूत सैनिक मुगलों का बहादुरी से सामना कर रहे थे। प्रताप उस समय बस्ती में थे और देशभक्ति गीतों में झूम रहे थे। उसी समय एक मुगल उन्हें साधारण गांववासी समझकर तम्बू में ले गया और उसे चारण (एक तरह की गीत शैली) गाने को कहा। प्रताप से स्थानीय भाषा में गीत सुनाने के पीछे मुगलों का उद्देश्य चित्तोड़ के लोगों को गुमराह करना था। मुगल सैनिकों की योजना थी कि जब चारण गाया जाएगा तो किले के भीतर तक आवाज जायेगी। ऐसे में राजा को लगेगा कि राजपूत मदद की गुहार लगा रहे हैं और ऐसे में वह दुर्ग के मुख्य दरवाजे खोल देंगे।

मुगलों की यह योजना तब उल्टी पड़ गई जब प्रताप ने अपनी सुरीली आवाज में इस तरह के गीत गुनगुनाये, जिससे कि दुर्ग के सैनिक सावधान हो गए। दुर्ग के सैनिकों ने खतरे का आभास होते ही मुगलों पर तीरों की बरसात कर दी। ऐसी स्तिथि में वहां मौजूद सभी मुग़ल मारे गए और प्रताप की गीत-संगीत की कला ने चित्तौड़ को बड़े आक्रमण से सुरक्षित कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रताप अपनी कुटिया की तरफ लौटने लगे, तभी उन्होंने बस्ती के सभी नागरिकों को कहा-

“देश भक्ति केवल तीरों या तलवारों में नहीं होती और केवल राजपूतो की मोहताज नहीं होती। एक साधारण चारण से भी बड़ी जंग जीती जा सकती हैं।”


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