Commonwealth Games 2022: जानिए कौन हैं बिंदियारानी देवी? किराने की दुकान से रजत पदक जीतने तक का सफर...
बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (Commonwealth Games 2022) में मणिपुर की बिंदियारानी देवी ने भारत को रजत पदक दिलाया हैं। 23 वर्षीय वेटलिफ्टर बिंदियारानी ने महिलाओं के 55 किलो भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीता हैं। पूरे देश से उन्हें बधाइयों की बाढ़ आ रही हैं। ऐसे में हर कोई उनकी निजी लाइफ के बारे में जानना चाहता हैं। इसी कड़ी में हम आपको बता रहे हैं रजत पदक विजेता बिंदियारानी देवी की निजी जिंदगी से जुड़े कुछ फैक्ट्स …
मीराबाई के नेशनल रिकॉर्ड की बराबरी
बिंदियारानी देवी ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में रजत पदक जीतते ही मीराबाई चानू के नेशनल रिकॉर्ड की बराबरी की। उन्होंने स्नैच में मीराबाई चानू के 86 किलो के नेशनल रिकॉर्ड की बराबरी की। बिंदियारानी ने क्लीन एंड जर्क में 116 किलो भार उठाकर कुल 202 किलो वजन उठा रजत पदक नाम किया।
बिंदिया चलाती हैं किराने की दुकान
मीराबाई चानू को अपना आदर्श मानने वाली बिंदियारानी देवी किसान की बेटी हैं। वह अपने गांव में ही किराने की दुकान भी चलाती है जिससे उनके परिवार को खर्चा चलाने में मदद मिलती हैं। बिंदियारानी ने अपनी छोटी लंबाई के कारण भारोत्तोलन (Weightlifting) शुरू किया था। वह मणिपुर की उसी अकादमी में ट्रेनिंग करती है जहां से निकलकर मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में झंडा गाड़ा था।
मीराबाई ने बढ़ाया था मदद का हाथ
बीते साल हुए कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने के बाद बिंदियारानी ने अपनी सफलता का श्रेय ‘मीराबाई चानू’ को दिया था। बिंदिया अपनी सीनियर मीरा को ‘दीदी’ कहकर बुलाती हैं। बिंदिया ने कहा था कि वह (मीराबाई चानू) ट्रेनिंग में मेरी मदद के लिए हमेशा मौजूद रहती हैं। जब मैं कैंप में नई थी तो उन्होंने मुझे लिफ्टिंग शूज़ खरीदकर गिफ्ट किये थे। क्योंकि दीदी को पता था कि मेरे पास लिफ्टिंग शूज़ खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।
बिंदियारानी को नौकरी की जरुरत …
‘मेरे परिवार को इसकी सख्त जरूरत है। मैं एक अमीर परिवार से नहीं आती, इसलिए नौकरी पाना अब महत्वपूर्ण है। ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना हमेशा से मेरा सपना है। मीरा दी को ओलंपिक में ऐसा करते देखने के बाद, मैं इसे हासिल करने के लिए और अधिक प्रेरित महसूस करती हूं।’
जानिए कौन हैं बिंदियारानी देवी?
बिंदियारानी पहले ताइक्वांडो प्लेयर थीं। उन्होंने खुद बताया है कि 2008 से 2012 तक ताइक्वांडो खेलती थी, लेकिन फिर वेटलिफ्टिंग करने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि मुझे लंबाई की समस्या थी इसलिए मुझे शिफ्ट होना पड़ा। सभी ने कहा कि मेरी लंबाई वेटलिफ्टटिंग के लिए आदर्श है।

कैसा रहा अबतक का सफर?
- 2016 में मलेशिया के पेनांग में आयोजित हुई विश्व युवा चैम्पियनशिप में इंटरनेशनल डेब्यू और 10वें स्थान पर रही।
- 2019 में साउथ एशियन गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया।
- साल 2019 में कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में भी गोल्ड को अपने नाम किया था।
- 2021 में विश्व चैम्पियनशिप में 55 किलो भार वर्ग के क्लीन एंड जर्क में गोल्ड मेडल।
- बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में 55 किलो भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।
बिंदियारानी ने स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू की कोच रह चुकीं अनीता चानू के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया है।

Comments
Post a Comment