आधुनिक शिक्षा प्रणाली: लाखों-करोड़ों की खर्चीली पढ़ाई के बावजूद भी युवा बेरोजगार
विश्व की सबसे पुरानी शिक्षण व्यवस्था रखने वाला भारत देश आज शिक्षा के छेत्र में अन्य देशों की तुलना में काफी पीछे हैं। जिसका मुख्य कारण हैं देश की प्रतिभा का देश के अंदर उचित उपयोग नहीं हो पाना। आज भारत शिक्षा की उस दहलीज पर खड़ा हैं जिसे अगर समय रहते नहीं सुधारा गया तो इसका घोर अंधकारी परिणाम निश्चित हैं।
अन्य देशों से शिक्षा में पिछड़ रहा भारत
जी हाँ, नालंदा और बनारस जैसे प्रमुख विश्वस्तरीय जैसे ज्ञानपीठ भारत अन्य देशों से शिक्षा में पिछड़ रहा हैं तो इसके कारणों का पता लगाना उतना ही आवश्यक हैं जितना कि पेट की भूख मिटाने के लिए खाने की सही वस्तु का चयन करना। प्राचीन भारत में गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था का अंत का परिणाम था अंग्रेजी शिक्षा का संक्रमण। इसी प्रकार आधुनिक भारत की शिक्षा प्रणाली का अंत भी निश्चित लगता हैं।
किताबी ज्ञान को दिया जा रहा बढ़ावा
आधुनिक शिक्षा प्रणाली की बात करे तो भारत में जितनी महत्वत्ता किताबी ज्ञान को दी जा रही हैं अगर उससे कई अधिक महत्वत्ता प्रायोगिक ज्ञान को दी जाए तो संभवतया देश का विकास होगा। यहां बाल्यकाल से विद्यार्थियों को इतिहास की ओर धकेला जाता रहा हैं। परंतु अगर इतिहास को उचित दृष्टि से समझाने के लिए सिर्फ आर्ट गैलरी, चलचित्रों और सेमीनार के माध्यम का प्रयोग किया जाए तो संभवतया सही कदम होगा।
लाखों-करोड़ो खर्च के बाद भी बेरोजगार युवा
सरकारी प्रशासन और देश के हर युवा को यह जानने की आवश्यकता हैं कि इस देश की योग्य प्रतिभाएं उच्च शिक्षा के लिए विदेशों का रुख क्यों कर रही हैं। इस बात पर भी जरूर गौर करना चाहिए कि हमारे यहां चल रहे 3 से 4 वर्षीय स्नातक प्रोग्राम्स का कितना फायदा देश को मिल पा रहा हैं। सोचने की आवश्यकता हैं कि लाखों-करोड़ो के खर्च के बाद भी देश का युवा रोजगार की तलाश में क्यों हैं। सोचिये जरूर !
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