राजनीतिक करियर: क्या सच में युवाओं के लिए राजनीति बन गई करियर का मार्ग ?
एक समृद्ध देश के शासन को चलाने के लिए किसी शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं होती इस बात का प्रमाण प्रस्तुत करता हैं भारत देश। ये वो देश हैं जहां आपको जननायक बनने के लिए किसी ख़ास शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं होती। शायद हम गलत हो, हमारे द्वारा एकत्रित की गई जानकारी गलत हो। लेकिन देश की राजनीती में जो प्रत्यछ हैं उसे नहीं ठुकराया जा सकता।
शिक्षा से ज्यादा आयु को दिया जा रहा महत्त्व
उम्मीद करते हैं आप जानते होंगे कि अगर आप देश के लीडर (सरपंच,पार्षद, विधायक या सांसद) बनना चाहते हैं तो आपके लिए कोई अधिक एजुकेशन प्राप्त करना अनिवार्य नहीं हैं। हाँ, लेकिन देश के सर्वोच्च पदों (जैसे:-प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति) पर आसीन होने के लिए आपको एक विशेष आयुवर्ग में होना बहुत जरुरी हैं। यह भी कहा जा सकता हैं कि भारत के लोकतंत्र को चलाने के लिए शिक्षा से ज्यादा आपकी आयु को महत्त्व दिया जा रहा हैं।
जनसेवा की राजनीति बनी करियर का मार्ग
आधुनिक भारत में आज का समय वो हैं जब किसी बालक में समझ का विकास होता हैं, वह अपने करियर का चुनाव करने के लिए स्वंतत्र होता है तो वो राजनीती को अपना करियर बनाने की सोचने लगता हैं। ये वहीं राजनीती हैं जिसे एक समय जनसेवा का नाम दिया जाता था। जनसेवा की राजनीती कब देश के युवाओं के लिए करियर का मार्ग बन गई यह एक गंभीर सवाल हैं, जिस पर विचार करना चाहिए।
प्रतियोगी परीक्षाओं से हो नेताओं का चुनाव
एक विचार हैं जिस पर सोचा जा सकता हैं ! वो ये हैं कि क्यों न देश की राजनीती के जननायकों के चुनावी प्रक्रिया को इन्हीं के द्वारा बनाई गई शिक्षण प्रणाली के साथ जोड़ दिया जाए ? सोचिये ! अगर आपके इन कतिथ जननायक का चुनाव आप ना करके इनका चुनाव प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम से कर दिया जाए तो राजनीती का रूप कैसा हो ? बशर्ते इन चुनावों में किसी प्रकार की आरक्षित छूट का लाभ ना हो।
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