राजनीतिक करियर: अब प्रतियोगी परीक्षाओं से हो नेताओं का चुनाव


संभवतया मेरा भारत देश विश्व का एकमात्र ऐसा देश होगा जहां योग्यता से ज्यादा आयु को महत्वत्ता दी जाती हैं। देश की राजनीती में कब क्या हो जाए किसी को नहीं मालूम। मेरा सोचना हैं कि अगर देश अपने इन्हीं पुराने ढर्रों पर चलता रहा तो विकास तो क्या इसका शेष अस्तित्व भी बचा पाना मुश्किल होगा। आखिर कब तक ये देश आँखों पर पट्टी बांधे कतिथ जनसेवकों द्वारा चलाया जाता रहेगा। एक तरफ जहां विश्व स्तर पर बेहतरीन शिक्षा सहयोग से कई बड़े कार्य सफलतापूर्वक किये जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर भारत जैसे बड़े देश का शासन अयोग्य व्यक्तियों के हाथ में सौंपा जा रहा हैं।



राजनीती में करियर बनाना कोई बड़ा काम नहीं 

मैं इस बात को प्रमाणित नहीं करता लेकिन जो सबके सामने हैं उसे झुठलाया भी तो नहीं जा सकता न। यह देख पाना मुश्किल नहीं होगा कि भारत जैसे विकासशील देश में बेरोजगारी का स्तर किस ऊंचाई पर पहुंच चुका हैं। तीन से चार-चार वर्ष के अध्ययन के बाबजूद देश में योग्यता का रोजगार की तलाश में भटकना अब खटकने लगा हैं। शायद मेरा अनुमान ठीक हो तो उसके अनुसार देश में राजनीती में करियर देखने वाले युवाओं को किसी भी प्रकार की शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं हैं। लेकिन अपनी स्वयं की संतुष्टि के लिए आप मनचाही डिग्री हासिल कर सकते हैं। जो इस देश में कोई अधिक बड़ा मुश्किल कार्य नहीं होना चाहिए।



भोगविलासी लोगों का स्वागत करती देश की राजनीती 

आपको जानकर आश्चर्य होगा की शिक्षा के आधार पर प्राप्त की गई योग्यता को ठेंगा दिखाती हमारे देश की राजनीती में सर्वोच्च पदों पर आसीन होने के लिए किसी शैक्षणिक योग्यता की नहीं एक विशेष आयु वर्ग में होना बहुत ही आवश्यक हैं। अगर आप देश के युवा हैं तो आपका राजनीती बड़े चाव के साथ आनंद लेगी। और यदि आप भोगविलासी स्वभाव रखने वाले हैं तो भी आप देश के किसी भी राजनीतिक दलों में वानर की भांति उछल-कूद कर सकते हैं। एक समय जनसेवा की दृष्टि से देखी-समझी जाने वाली राजनीती कब युवाओं के लिए भविष्य का पाथ बन गयी, इस पर विचार होना चाहिए।



प्रतियोगी परीक्षाओं से हो जनसेवकों का चुनाव 

एक विचार हैं जिस पर सोचा जा सकता हैं ! वो ये हैं कि क्यों न देश की राजनीती के जननायकों के चुनावी प्रक्रिया को इन्हीं के द्वारा बनाई गई शिक्षण प्रणाली के साथ जोड़ दिया जाए ? सोचिये ! अगर आपके इन कतिथ जननायक का चुनाव आप ना करके इनका चुनाव प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम से कर दिया जाए तो राजनीती का रूप कैसा हो ? बशर्ते इन चुनावों में किसी प्रकार की आरक्षित छूट का लाभ ना हो।



443 words 2,192 characters


Comments

Popular posts from this blog

UP Police Bharti Exam Dates: यूपी पुलिस में कांस्टेबल भर्ती परीक्षा की नई डेट रिलीज, पढ़े पूरी डिटेल्स

बिना परीक्षा 4000 से ज्यादा पदों पर रेलवे में निकली भर्तियां, अंतिम तारीख से पहले करें आवेदन

IPL 2024 के Rajasthan Royals मैच टिकट करें ऑनलाइन बुक, इन 6 स्टेप्स को करें फॉलो