नया साल (2018): विकल्प की समस्या और कतार प्रेम
उमंग, उम्मीद और नई आशा के साथ 2017 जब आया उस समय एक साल था जो हमसे विदा ले रहा था-साल 2016...। संभवतया बेहद ही परेशानी देकर गया साल 2016 नोटबंदी के बोझ को 2017 के कंधो पर छोड़ गया। 2016 की जिम्मेदारी को बखूबी निभा पाता साल 2017 उससे पहले ही GST ने आम आदमी की कमर तोड़ दी। 2016 से शुरू हुआ लाइन का सफ़र 2017 में अनवरत् चलता रहा... अर्ताथ जन धन खाते, नोट्बंदी से लेकर GST रजिस्ट्रेशन, आधार लिंकिंग से लेकर बीएस-2 वाहनों की रोक हो, या हो प्रदूषण मुक्त वाहन प्रमाण बनाने के लिए लगी लम्बी कतार।
हमने साल 2017 से कतार प्रेम बखूबी सीख लिया है। यहाँ गौर करने योग्य बात ये है कि, जन-धन खातों की लाइनों से शुरू हुआ आम आदमी नोटबंदी की लाइन में लगकर इतना अभ्यस्त हो चुका था कि शेष कार्यों की लाइन में लगने वाले समय और परेशानीयों को भूल ही गया। पॉलीथिन बैन तो याद होगा न आपको ! उसकी सफलता – असफलता पर आप और हम क्यू बात नहीं करना चाहते ?
समस्या हैं ‘विकल्प‘ ! कारगर विकल्प हैं क्या ? न ही जनता आज तक समझ पाई हैं और न ही आला अधिकारी हमे समझा पाये, सवाल हैं .. तो बदला क्या ?
चलिए मैं आपको बताता हूँ कि, बदला क्या ...!
बदला हैं ..मेरा देश .. बदला है, भारी बहुमत से सत्ता सुख भोगने वाली पार्टी का मत प्रतिशत, अगर आजादी के 70 वर्षों बाद देश रोटी-कपडा-मकान-पानी-बिजली-स्वास्थ्य और रोजगार इन्हीं कुछ समस्या से जूझ रहा हैं तो माफ़ करियेगा ये देश मेरी कल्पनाओं में दूर -दूर तक नज़र नहीं आता। ये देश उन महापुरुषों का भी नहीं हो सकता, जिनके कारण हम आज स्वंतंत्र आकाश के नीचे रहने के योग्य बन सके है।
समस्या हैं ‘विकल्प‘ ! हमें चाहिए ‘राजनीतिक विकल्प‘ .. जरुरी हैं दो – तीन पार्टियों के रुतबे से देश को निकालना , अहंकार तोडना भी तो जरुरी है ना।
विकल्प ... जिसे हम देखना ही नहीं चाहते। जनसेवकों की मानी जाने वाली राजनीती कब करियर बन गई, समझ से परे है। देश की जमीनी समस्याएं हल नहीं हो जाती तब तक उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता की देश की अंतर्राष्ट्रीय पहचान किस स्तर पर है। बंद आँखों से हवा में मारा गया तीर कभी निशाने पर नहीं लगता, यह समझना भी जरुरी है। पद्मावती विवाद और बनास नदी हादसे के साथ अंत हुआ 2017 का।
बेशक हमे साल 2017 कुछ देकर नहीं गया, लेकिन हम मां भारती की संतान हैं हमे विरासत में मिली हैं ‘उम्मीद‘ , ‘आत्मविश्वास‘ और ‘संस्कार‘ जिसे अगर आज बचा पाए तो बेशक हर समस्या का पथ मुश्किल नहीं होगा। एक नए वर्ष और नई चुनौतियों के आगमन के लिए आपको मेरी शुभकामनाएं।
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